Tuesday, June 16, 2020

दूसरा मौका | New moral story in Hindi

New moral story in Hindi

ये कहानी है सुमित की, जो अपनी इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद अपना खुद का बिज़नेस स्टार्ट करता है | बड़े जोश के साथ, पूरी लगन से दिन रात एक करके अपना कारोबार शुरू करता है | लेकिन मार्किट में इतना ज्यादा कॉम्पटीशन है कि सुमित बहुत कोशिश करने के बाद भी बिजनेस को उस तरह से नहीं चला पा रहा, जैसा उसने सोचा था | 

उसने बैंक से लोन भी लिया हुआ है, तो उसका दबाब भी है | सारे कयाश लगाने के बाद भी सुमित को सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है | सुमित बहुत परेशान रहने लगता है | गमसुम, थका हुआ, और अकेलेपन का शिकार होते देख सुमित के माता पिता एक दिन उससे पूछते हैं – क्या हुआ बेटा, तुम आजकल काफी स्ट्रैस में रहते हो ? सुमित उत्तर देता है कि उसका बिज़नेस अच्छा नहीं चल रहा, अगर ऐसा ही रहा तो वो बैंक का लोन कैसे चुकाएगा, वह सड़क पर आ जाएगा | 

माता पिता समझाते हैं कि बेटा हिम्मत मत हारो, अभी तो तुमने बस शुरुआत की है, ऐसी समस्याएँ तो जिंदगी में आती रहती हैं लेकिन इसका ये मतलब तो नहीं कि तुम ऐसे स्ट्रेस लेना शुरू कर दोगे | ईश्वर ने चाहा तो जरूर सब अच्छा होगा, तुम देखना | कैसे अच्छा होगा पापा ? इतना बड़ा लोन अमाउंट मैंने बैंक से लिया है, बिज़नेस चल नहीं रहा और आगे कुछ रास्ता भी नहीं दिख रहा, मैं क्या करू ? कुछ समझ नहीं आ रहा – सुमित कहता है | 

माता पिता समझाते हैं, देखो बेटा तुम बस अपनी तरफ से पूरी कोशिश करो और बाकी भगवान् के उपर छोड़ दो , अगर सफल हुए तो ठीक नहीं तो कोई बात नहीं, बिज़नेस छोड़ के जॉब कर लेना कोई, तुम पढ़े लिखे हो | हम अपना घर, जमीन सब बेच देंगे, तुम लोन की टेंशन मत लो, बस मेहनत करो और बाकी ईश्वर के हाथ में छोड़ दो | सुमित माँ बाप की बातें चुपचाप सुन तो लेता है मगर उसे अंदर ही अंदर इस बात को लेकर भी चिंता होती है कि अगर मेरी वजह से मम्मी पापा को घर बेचना पड़ा तो वो भी सड़क पर आ जायेंगे | 

बहरहाल सुमित काफी कोशिश करता है लेकिन कामयाब नहीं हो पाता, उसके अंदर एक तरह का डर बैठ जाता है कि आगे क्या होगा ? कैसे होगा ? जब इन बातों का उसे कोई सौल्यूशन नहीं मिलता तो एक रात वो घर छोड़कर निकल जाता है | उसके शहर के बीच से एक नदी बहती है, उसी में डूब कर जिन्दगी ख़त्म करने के इरादे से वह आधी रात के अँधेरे में चल पड़ता है | 

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अँधेरी काली रात में दूर दूर तक कोई नहीं है, नदी के एक किनारे पर खड़ा वह अपने इधर उधर देखता है, लेकिन कोई नज़र नहीं आता | रात के अँधेरे में पानी जैसे डरा रहा था, अँधेरे में पानी भी काला स्याह नजर आ रहा था और उसकी गहराइयों से आती आवाज मानो जैसे शरीर में कम्पन पैदा कर रही थी | सुमित डरता डरता आगे बढ़ता है, नदी में आगे बढ़ते हुए पानी उसकी कमर तक आ पहुचता है कि तभी दूसरे किनारे की तरफ से अँधेरे आसमान में तेज उजाला होता है और जैसे कोई अजीब सी आवाज़ गूँजती है – ना ना ना | 

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सुमित एकदम से चौंक जाता है कि जरूर ये कोई ईश्वरीय शक्ति है | उसे अचानक से बहुत तेज़ डर लगता है, वह जल्दी से पानी से निकलकर दौड़ता हुआ बाहर आता है और फिरसे पीछे मुडकर देखता है, फिर से दूसरे किनारे पर तेज उजाला होता है, ये देखते ही सुमित डरकर वहां से भाग जाता है | घर पहुँचकर सुमित बिना किसी को बताये चुपचाप कपडे बदलकर सो जाता है | सुबह होती है और सुमित जैसे ही उठता है तो उसकी माँ मुस्कुराते हुए उसके कमरे में आती हैं | 

माँ को मुस्कुराते देखकर सुमित पूछता है - क्या हुआ माँ ? आप मुस्कुरा क्यों रही हो ? माँ कहती हैं – तुम्हारे पापा ने तुम्हारे लोन को चुकाने का इंतज़ाम कर दिया है ? वो गाँव में थोड़ी सी जमीन थी जिस पर खेती भी नहीं होती थी, कोई बिल्डर स्कूल बनाने के लिए उसे खरीद रहा है, तो आज तुम्हारे पापा डील फाइनल करने जा रहे हैं, बिल्डर का अभी अभी फ़ोन आया है | 

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वाह माँ, ये तो बहुत अच्छी न्यूज़ दी आपने, सुमित ने कहा | हाँ ! तो अब तू लोन की कोई टेंशन मत ले, मैं जानती हूँ कि तू मन लगाकर निडर होकर कोशिश करेगा तो जरूर कामयाब होगा, माँ कहती है | हाँ माँ ! अब मैं बिलकुल टेंशन फ्री हूँ, मैं पूरा दिल लगाकर मेहनत करूँगा | ठीक है तो अब तू फ्रेश होकर जल्दी से तैयार होजा, तेरे पापा जा ही रहे हैं और तुझे भी ऑफिस जाना है अपने – कहकर  माँ चली जाती हैं | सुमित को मन ही मन कल की बात पर अफ़सोस होता है कि वो क्या करने जा रहा था | 

तैयार होकर सुमित ऑफिस चला जाता है और पूरे जोश के साथ अपने काम में एक बार फिर से जुट जाता है, अब तो मानो जैसे उसको पंख लग गए थे, ईश्वर ने जैसे खुद उसको राह दिखाई हो, दुगने जोश के साथ वह काम करना शुरू कर देता है | शाम को घर वापस आता है तो पापा घर वापस आ चुके थे, वो सुमित के हाथ में चेक थमा देते हैं और कहते हैं – ये ले तेरा लोन फाइनल, अब मुझे तू डरा डरा नहीं दिखना चाहिए | सुमित भावुक होकर पापा के गले लग जाता है | 

कुछ ही दिनों में सुमित वो सुमित नहीं रहता, ना जाने कहाँ से उसमें इतनी ऊर्जा आ जाती है और उसका बिज़नेस पटरी पर आ जाता है और अगले ही कुछ महीनो में उसका काम बोलने लगता है | एक दिन घर आकर सुमित माँ से कहता है कि माँ, ये सब आप और पापा की वजह से ही हो पाया है वरना मैं तो कब का हार चुका था और आप प्लीज पापा से मत कहना लेकिन सच बताऊ तो मैं नदी में कूदकर मरने वाला था | इतना सुनकर माँ हैरान परेशान हो जाती है वो रोने लगती है, पर सुमित माँ को समझाता है कि माँ ये पुरानी बात हो गयी, अब आप टेंशन मत लो | 

लेकिन माँ नहीं मानती, वो सुमित से अपने गुरूजी के पास चलने के लिए कहती हैं कि जरूर तुझे किसी की नज़र लगी है | सुमित मना करता है कि माँ अब मैं बिलकुल ठीक हूँ, एक अलौकिक रौशनी ने मुझे बचा लिया था, अब कोई जरुरत नहीं कहीं जाने की | लेकिन माँ नहीं मानती, वो सुमित को लेकर तुरंत अपने गुरूजी के पास ले जाती हैं | 

गुरूजी सारी कहानी सुनकर कहते हैं – हाँ मैंने ही इसे उस दिन बचा लिया, वो दिव्य रौशनी मेरे ही प्रभाव से प्रकट हुई जिसने इसे डूबने से रोका | अब ये ठीक है, डरने की कोई बात नहीं है | माँ गुरूजी को धन्यवाद देती हैं और उनका आशीर्वाद लेकर दोनों लौट आते हैं | माँ सुमित को अपनी सौगंध देती है कि कभी भूलकर भी ऐसा ख्याल अपने दिमाग में नहीं लायेगा | सुमित माँ की बात मान लेता है और कहता है कि पापा से भूलकर भी इस बात का जिक्र न करना | माँ भी यह बात मान लेती हैं और न बताने का वादा करती हैं | 

अगले कुछ सालों में ही सुमित की मेहनत रंग लाती है और उसका बिज़नेस शीर्ष पर पहुच जाता है | शहर के सबसे बड़े नामों में उसका नाम शुमार हो जाता है, सुमित की शादी भी हो जाती है | शादी के कुछ दिन बाद देर रात को अपनी पत्नी के साथ वो उसी नदी के किनारे से गुजर रहा होता है कि अचानक उसकी नज़र दूसरे किनारे पर पड़ती है | सुमित चौंक जाता है वहां फिर से आज वही तेज़ रौशनी अचानक से दिखती है | 

सुमित तुरंत गाडी घुमाता है और पुल पार करके दूसरा किनारा जहाँ रौशनी दिखी थी, उसकी तरफ गाड़ी ले जाने लगता है | पत्नी पूछती है – क्या हुआ, आप इधर क्यों जा रहे हो ? सुमित कहता है – बस पाँच मिनट रुको, मुझे कुछ दिखा था इधर | सुमित थोड़ी ही देर में दूसरे किनारे पर पहुँचता है, चारो तरफ अँधेरा था लेकिन एक छोटी सी दुकान वहां खुली थी | 

सुमित दौड़कर दुकान पर पहुचता है और फिर से बहुत तेज़ रौशनी दुकान में दिखती है | सुमित हैरान हो जाता है और बहुत जोर जोर से हँसने लगता है | वो एक वेल्डिंग की दुकान थी जहाँ लोहे को जोड़ा जाता है ,उस दुकान से लोहे को पीटने का शोर भी आ रहा था जो रात में ना ना ना जैसा सुनाई दे रहा था | सुमित को देखकर दुकान में काम कर रहे दोनों लोग बाहर निकल आते हैं, पूछते हैं – क्या हुआ साहब ? सुमित पूछता है – आप लोग इतनी रात में भी काम कर रहे हैं ? दोनों कहते हैं – जब आर्डर ज्यादा होते हैं तो कभी कभी रात में भी काम करते हैं साहब |

 सुमित दोनों लोगों के गले लग जाता है | दोनों पूछते हैं – क्या हुआ साहब ? क्या बात है ? सुमित कहता है – कुछ नहीं, सब ठीक है, तुम लोगों को कभी कोई भी जरुरत पड़े, तो मुझे याद करना, मुझे बहुत ख़ुशी होगी, कहकर सुमित पत्नी के साथ घर वापस आ जाता है | पत्नी पूछती है – क्या हुआ तुम उन दोनों से मिलकर इतने खुश क्यों थे ? सुमित उत्तर देता है – जिनको तुमने आज देखा, वो इंसान नहीं, ईश्वर थे | ***


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