Wednesday, June 03, 2020

सरला : कहानी | Sarla : Kahani

Sarla : Kahani

सरला, शहर के एक प्राथमिक विद्यालय में अध्यापिका है | उसकी रोज की दिनचर्या में सुबह 4 बजे उठ जाना और फिर 5 बजे माता के मंदिर जाना सम्मिलित है | मंदिर उसके घर से काफी दूरी पर खेतों के बीच जंगल में है, अतः आने जाने में लगभग डेढ़ घंटा लग जाता है, उसके बाद घर आकर पूजा करना, भोजन करना और फिर 8 बजे विद्यालय चले जाना, यह उसका रोज का नियम है | बारिश, आँधी, तूफ़ान, ठण्ड, या अन्य कोई समस्या क्यों न हो , सरला की यह दिनचर्या नहीं बदलती है | 

वह काफी आस्थावादी है और ईश्वर की सच्ची भक्त है | एक दिन की बात है , सर्दियों का समय था, सरला को उस दिन शहर में ही एक शादी में जाना था ,अतः सरला शाम को समय से शादी में चली गयी, वहां उसके सभी रिश्तेदार आये हुए थे, सभी से मिलकर और शादी अटेंड करके वो वापस आने लगी, रिश्तेदारों ने रुकने के लिए बोला, लेकिन सरला ने कहा कि उसे सुबह मंदिर जाना है , यहाँ रहकर वो मंदिर नहीं जा पायेगी |  इस पर रिश्तेदारों ने भी फिर ज्यादा जिद नहीं की और सरला वहाँ से अपने घर के लिए चल दी |  रात में समय से वो अपने घर पहुँची और सो गयी |  

Story in Hindi

     एक समय के बाद अचानक सरला की नींद टूटी और उसने पास रखी घड़ी में समय देखा, सवा पाँच बज रहे थे, सरला ने मन में सोचा कि आज वह पक्का लेट हो जाएगी , सरला जल्दी से  उठी और झटपट तैयार होकर मंदिर के लिए निकल पड़ी | सर्दियों का समय था, बहुत तेज़ - तेज़ क़दमों से चलते हुए  सरला यही सोच रही थी कि आज पता नहीं कैसे नहीं उठ पायी, शायद शादी में जाने की वजह से ? कहीं ज्यादा लेट न हो जाऊँ ? तभी सरला ने महसूस किया कि आज सड़क पर कोई नहीं है, रास्ते में एकदम सन्नाटा पसरा हुआ है जैसा अन्य दिनों नहीं होता था, यह देखकर सरला थोडा डरी | 

पता नहीं आज क्या हुआ है सबको, एक तो मैं भी लेट हो गयी और लोग जाने कहाँ गायब हो गए, कोई नहीं निकला आज घर से – ऐसा सोचते सोचते सरला मेन बाज़ार को पार कर जंगल में मंदिर की ओर चल दी | आज सरला परेशान भी थी और घबरायी हुई भी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है | रास्ते में झींगुरों की आवाज़ का शोर मानो जैसे किसी अनहोनी की चेतावनी दे रहा था, दूर दूर तक कोई नहीं दिख रहा था, सरला कभी आगे देखती तो कभी पीछे लेकिन कोई नज़र नहीं आ रहा था, सरला डर की वजह से और तेज़ चलने लगी | 


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थोड़ी दूर आगे चलने पर सरला को एह्सास हुआ कि कोई उसके पीछे आ रहा है, अतः सरला ने अपनी चाल कुछ कम की और पीछे देखने लगी | अँधेरा काफी था इसलिए कुछ साफ़ नहीं दिख रहा था, नजदीक आने पर उसने देखा एक बूढी औरत  है , ये देखकर सरला की जान में जान आई |

 कहाँ जा रही हो बेटी ? – बूढ़ी औरत ने पूछा | माँ जी मंदिर जा रही हूँ , पर आज कोई सड़क पर दिख ही नहीं रहा, पता नहीं कहाँ चले गए सब लोग, सरला ने कहा | अच्छा ! मैं भी मंदिर ही जा रही हूँ , हाँ आज निकला नहीं है कोई अभी तक, चलो अच्छा है, हम लोग एक से दो हो गए , आज अँधेरा भी ज्यादा है, बूढी औरत ने कहा | हाँ माँ जी ! मुझे तो सच में डर लग रहा था, कोई दिख भी नहीं रहा आज और इतना अँधेरा है, अच्छा हुआ कि आप मिल गयीं, वरना मेरी तो हालत ख़राब हो रही थी | 

बूढ़ी औरत हँसी और बोली – जब माता के यहाँ जा रही हो तो डर कैसा , उसी को याद करतीं, डर चला जाता  | हाँ माँ जी ! याद ही तो कर रही थी, तभी तो आप मिल गयीं, दोनों हँसने लगीं और ऐसे ही बातें करतीं हुई आगे बढ़ गयीं | 

sarla kahani
Sarla kahani
कुछ देर के बाद दोनों मंदिर पहुँची तो देखा कि मंदिर के गेट पर ताला लगा है, ये देखकर सरला बोली – ये लो, आज तो पुजारी जी ने ताला ही नहीं खोला, रोज तो 5 बजे ही खोल देते थे | लगता है पुजारी जी भी सोते रह गए आज, चलो गेट के बाहर से ही पूजा कर लेते हैं, बूढी औरत ने कहा | हाँ माँ जी ! ठीक कह रही हो, ऐसा ही करते हैं | दोनों पूजा करने लगीं और कुछ देर के बाद धूप आदि करके मंदिर से वापस घर की ओर चल दीं | 

वापस लौटते हुए सरला ने कहा – माँ जी ! आपके साथ तो आज वक़्त का पता ही नहीं चला सच, आप रोज मंदिर जाती हैं क्या ? क्यूँ न हम रोज ही साथ जाया करें | नहीं बेटी, रोज तो नहीं आ पाती हूँ, कभी - कभी ही आ पाती हूँ, काफी दूर पड़ता है और मुझे चलने में थोड़ी तकलीफ होती है इसलिए | अच्छा कोई बात नहीं माँ जी, पर सच मैं आपके साथ बहुत अच्छा लगा | मुझे भी बहुत अच्छा लगा बेटी, बूढी औरत ने कहा |  

थोड़ी देर में जंगल का रास्ता पार कर दोनों  शहर  में आ गयीं तो सरला बोली – आज बस मैं लेट न हो जाऊँ, और दिन तो अब तक घर पहुँच जाती थी, पता नहीं आज कैसे नहीं उठ पाई, शायद शादी में जाने की वजह से ? नहीं बेटी ! लेट नहीं होगी , कितना टाइम हुआ होगा अभी ? पता नहीं माँ जी ! आज तो टाइम का कुछ पता ही नहीं , सरला ने कहा |  

अच्छा कोई बात नहीं , लेकिन तुम लेट नहीं होगी , घर जाकर टाइम देख लेना, बूढ़ी औरत ने कहा | इस पर सरला मुस्कुरायी और बोली – ठीक है माँ जी | अच्छा तो बेटी अब मुझे इस तरफ जाना है , मेरा घर इधर है, तुम किधर जाओगी ? मैं तो सीधे जाऊँगी माँ जी | ठीक है तो बेटी , मैं चलती हूँ, कहकर बूढी औरत दूसरी ओर चल दी और सरला दूसरी ओर | 

     कुछ ही देर में सरला घर पहुँची और अपने कमरे में जाकर सबसे पहले टाइम देखने के लिए घड़ी की ओर देखा | देखते ही सरला चौंक गयी , घड़ी में अभी भी सवा पाँच ही बजे थे | ध्यान से देखने पर सरला ने पाया कि घड़ी तो बंद है, वह तुरंत दूसरे कमरे में लगी घड़ी की ओर दौड़ी और जैसे ही टाइम देखा तो सरला के होश उड़ गए | घड़ी में रात के 2 बजे थे |  ***


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