Saturday, June 13, 2020

शेरू : कहानी | Sheru : Hindi story short


Sheru : Hindi story short

पुराने समय की बात है, एक राजा था और उसका एक बजीर था | बजीर के पास शेरू नाम का एक कुत्ता था जो बहुत बफादार था | एक बार बजीर ने राजा से कुछ पैसा उधार लिया और कुछ समय बाद लौटाने का वादा किया | समय बीतता गया किन्तु बजीर राजा का पैसा न लौटा सका | 

राजा ने बजीर से कहा कि अब तुम्हे अपनी कोई चीज़ मेरे पास गिरवी रखनी होगी , तभी मैं तुम्हे पैसा लौटाने के लिए और समय दूंगा | इस पर बजीर ने कहा – महाराज मेरे पास तो गिरवी रखने के लिए कुछ भी नहीं है, सिर्फ ये मेरा बफादार कुत्ता है, अगर आप चाहे तो इसे अपने पास रख सकते हैं | राजा बोला – क्या ये सच में बफादार है | 

राजा के अन्य दरबारियों में से एक तुरंत बोला – जी महाराज ! यह कुत्ता बहुत बफादार है | आप इसे अपने पास रख सकते हैं | राजा ने दरबारियों की बात मान ली और बजीर से कुत्ते को गिरवी रखने के लिए कहा |  बजीर ने कुत्ते से कहा – शेरू ! मैं तुम्हें राजा साहब के पास कुछ समय के लिए गिरवी रख रहा हूँ , जब तक मैं राजा साहब के पैसे नहीं लौटा देता, तुम्हे इन्हीं के पास रहना होगा, मैंने इनसे वादा किया है, मेरी इज्जत रख लेना | बजीर की बात सुनकर शेरू मानो जैसे सब समझ गया | 

Sheru hindi story short
Sheru Hindi story short

बजीर ने कुत्ते को राजा  साहब के पास हवाले कर दिया और भारी मन से वहां से आ गया | शेरू अब राजा साहब के यहाँ रहने लगा | कुछ दिनों के बाद एक दिन कुछ चोर, राजा के यहाँ चोरी करने के लिए आये | घर के सब लोग सो रहे थे लेकिन शेरू जाग रहा था | चोरों को देखकर शेरू भोंकने लगा और चोरों की तरफ दौड़ा लेकिन चोर संख्या में बहुत ज्यादा थे और उनके पास हथियार भी थे इसलिए वे किसी तरह शेरू से बच गए और जल्दी से धन लेकर जाने लगे | उधर राजा के घर के सदस्यों ने शेरू के भोंकने की आवाज़ सुनी तो सोचा कि ये कुत्ता अभी नया नया आया है और शायद अपने मालिक को याद करके भोंक रहा है, इसलिए उन सभी लोगों ने उस वक़्त ज्यदा ध्यान नहीं दिया और बाहर आकर देखने का प्रयास नहीं किया कि आखिर माजरा क्या है | 

बहरहाल चोर धन लेकर जंगल की ओर चल दिए | शेरू ने जब देखा की उसकी आवाज़ सुनकर बाहर कोई घरवाला नहीं आया है तो उसने चुपचाप चोरों का पीछा करना शुरू कर दिया | चोर आगे आगे जंगल की ओर जा रहे थे और शेरू दबे पाँव उनके पीछे पीछे जा रहा था | बीच जंगल में एक सुनसान स्थान पर पहुँचकर चोरों ने एक गड्ढे में सारा धन छुपा दिया और गड्ढे को मिटटी से ढककर चले गए | शेरू यह सब देख रहा था, वह भी चोरों के चले जाने के बाद वहां से सीधा राजा के घर आ गया | 

सुबह जब राजा और परिवार के सभी लोग जागे तो चोरी का पता चला | लोगों को अब ये समझने में जरा भी देर नहीं लगी कि शेरू रात  इसीलिए भोंक रहा था | सभी लोग बहुत पछता रहे थे |  राजा ने तुरंत पूरे राज्य में चोरों को पकड़ने के लिए घोषणा करा दी कि तभी शेरू राजा के पास गया और राजा के कपड़ो को पकड़कर खीचने लगा | सब लोग शेरू के इस व्यवहार पर हैरान थे, तभी राजा ने कहा कि ये शायद कुछ कहना चाहता है या शायद कहीं ले जाना चाहता है, अतः राजा ने शेरू के साथ साथ चलना शुरू कर दिया | 

Hindi story short

आगे आगे शेरू और पीछे पीछे राजा व सैनिक चल रहे थे | शेरू ने उसी स्थान पर पहुँचकर जहाँ धन गडा था , अपने पैरो से खोदना शुरू कर दिया | ये देखकर राजा ने सैनिको को वहां खोदने का आदेश दिया | सैनिको ने जब उस स्थान को खोदा तो सारा चुराया हुआ धन वहीँ गडा मिला, उन्होंने सारा धन निकालकर राजा के सामने रख दिया | राजा बहुत खुश हुआ | उसने कहा – बजीर का कुत्ता वाकई बहुत समझदार है, इतना पैसा तो मैंने बजीर को उधार भी नहीं दिया, इससे कई गुना ज्यादा धन वापस दिलाकर इस कुत्ते ने हम पर बहुत बड़ा उपकार किया है, इसलिए हम इस कुत्ते को आजाद करते हैं | 

राजा ने एक चिट्ठी लिखकर शेरू के गले में बाँध दी, और शेरू को रिहा कर दिया | शेरू ख़ुशी से झूमता नाचता अपने मालिक के घर को दौड़ा | जैसे ही शेरू मालिक के घर पंहुचा तो शेरू को वहां देखकर वजीर ने सोचा कि ये वहां से भाग आया है | शेरू को देखते ही वजीर ने उसे मारना शुरू कर दिया, मैंने तुझसे मना किया था आने के लिए, जब तक मैं राजा के पैसे नहीं लौटा देता लेकिन तूने मेरी इज्जत नहीं रखी, ऐसा कहकर वजीर शेरू को पीटता रहा | 

शेरू चुपचाप पिटता रहा और तभी वजीर की नजर शेरू के गले में पड़ी चिट्ठी पर पड़ी, वजीर ने चिट्ठी खोलकर पड़ी , जिसमें लिखा था – इस कुत्ते ने मेरा चुराया सारा धन मुझे वापस दिलाकर मेरी और पूरे राज्य की सहायता की है इसलिए मैं तुम्हारा कर्ज माफ़ करता हूँ और इस कुत्ते को आजाद कर रहा हूँ | अब ये पढ़कर वजीर को बहुत अफ़सोस हुआ | उसने तुरंत शेरू से माफ़ी मांगी और उससे लिपट कर रोने लगा |  शेरू की आँखों से आँसू आ गए , वह भी अपने मालिक से लिपट गया मनो जैसे कह रहा हो – कोई बात नहीं, मैं ठीक हूँ | ***



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