Friday, July 31, 2020

बच्चों की कहानी | Hindi kahani for kids

Hindi kahani for kids

एक जंगल में एक सियार रहा करता था | वह बहुत ही चालाक तथा दुष्ट था | एक दिन वह जंगल में घूम रहा था कि तभी उसकी नज़र एक सारस पर पड़ी |

hindi kahani for kids
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सारस तालाब में मछली पकड़कर खा रहा था | सारस को इतनी आसानी से मछली पकड़ता देख सियार हैरान था | मछलियों को देख उसके मुंह में पानी रहा था |

सियार ने सोचा, क्यों   इस सारस से दोस्ती कर ली जाये | अगर दोस्ती हो गयी तो सारस मुझे भी मछलियाँ खाने को देगा | सियार ने अपने मतलब के लिए सारस से दोस्ती कर ली |

अब जब भी सारस मछलियाँ पकड़ता तो सियार भी वहां फ्री में मछलियाँ खाने पहुँच जाता |

चूंकि सारस तो सियार को सच्चा दोस्त मानता था, इसलिए वह उसको मछलियाँ खाने के लिए दे देता था किन्तु सियार बहुत दुष्ट था, वह दूसरे जानवरों को अपमानित करने और परेशान करने के लिए कुख्यात था |

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कई जानवरों ने सारस को बताया कि सियार तुम्हारा दोस्त नहीं है, वह सिर्फ अपने मतलब के लिए तुम्हारा दोस्त बनने का दिखावा कर रहा है, तुम उससे दूर रहो | लेकिन सारस ऐसा नहीं मानता था, वह सियार पर भरोसा करता था |

सियार स्वभाव से ही दुष्ट और चालाक था, वह मन ही मन सारस से जलता था | एक दिन सियार ने सारस को भी अपमानित करने का सोचा |

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सियार ने सारस को अपने घर दावत के लिए बुलाया और और दो प्लेटो में सूप परोसा |

अब सारस अपनी लम्बी चोंच के कारण प्लेट से सूप नहीं पी सकता था अतः सियार अपनी प्लेट से सूप पीने लगा | सारस ने काफी कोशिश की लेकिन वह सूप नहीं पी पा रहा था | सारस को ऐसा देखकर सियार मन ही मन खुश हो रहा था |

सियार ने सारस से पूछाक्या हुआ ? सूप अच्छा नहीं लग रहा क्या ? सारस ने कुछ नहीं कहा, वह सियार की चालाकी को समझ गया और फिर मुस्कराकर बोला- नहीं, सूप तो वाकई बहुत अच्छा है, जितना पीना था  मैं पी चुका, इससे ज्यादा मुझसे नहीं पिया जायेगा |

सारस ने जाने के लिए आज्ञा मांगी और जाते जाते सियार को अगले दिन अपने घर दावत का निमंत्रण दिया | सियार अगले दिन ख़ुशी से सारस के घर दावत के लिए पहुँच गया |

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सारस ने दो सुराही आगे रख दी और कहाये लो आज मैंने भी सूप बनाया है, पी लो | अब सारस की चोंच तो लम्बी थी, वह आसानी से सूप पीने लगा किन्तु सियार चाहकर भी सुराही से सूप नहीं पी पा रहा था, उसका मुंह सुराही में नहीं घुस पा रहा था |

अब सियार को देखकर सारस बोलाक्या हुआ ? सूप अच्छा नहीं लग रहा क्या ? ये सुनकर सियार को अपने शब्द याद गए, वह बहुत लज्जित हुआ, उसने सारस से अपने व्यव्हार के लिए क्षमा मांगी और अपमानित होकर वहां से चला गया |

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी दूसरों का अपमान नहीं करना चाहिए | जैसा व्यवहार हम लोगों के साथ करते हैं, वैसा व्यवहार ही लोग फिर हमारे साथ करते हैं |

यदि दूसरों से सम्मान की आशा रखते हो तो स्वयं भी दूसरों का सम्मान करो | ***


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